Thursday, July 28, 2016

यहा जमाने को मुझे यू हराने का इरादा नापाक बन गया,

यहा जमाने को मुझे यू हराने का इरादा नापाक बन गया,
एक हसीना सा दिल मे खवाब था बेवजह खाक बन गया,

जब भी मेने झूठ देखा समझा जाना यहा,
मेरे सच कहने का असूल ओर भी बेबाक बन गया ,

गिरना सभलना चलता रहा ज़िदगी हे हर दोर मे,
जब भी सभला गिराना सबकी नजरो मे फिराक बन गया,

ज़िदगी को सिर्फ़ इतना सा ही समझा हे मेने,
बेईमानी फरेब जहा भी साथ मिले तब हर झूठ भी पाक बन गया
p@W@n

Friday, June 24, 2016

ये समझदारी भी किस काम की हे यहा !

ये समझदारी भी किस काम की हे यहा,
बडा ही अज़ान ओर असमझ सा रास्ता हे मेरा !!!
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चलने का जून्ँन हे अभी भी मुझमे रास्तो की खबर कहा,
अब तो सिर्फ़ चाह रुककर थमकर बेठने की किसी ठिकाने पर,


अजीब सी कशमकश हे ज़िदगी के इस दोर मे यहा,
वही निगाहे वही अपनापन ओर ज़िदगी फिर मुकम्मएल निशाने पर,

हमसे क्या पूछते हे हम क्या हे हम क्या थे,
सिर्फ़ मकसद ओर बचा यही सवाल हे यहा क्या जमाने पर,

जानता हू खवाब ओर हकी कत के हर एक वक्त को,
ये जवानी हे ,,वो बचपना था जो निकल गया यू बहलाने पर,

जाना हे अगर भूला सको तो भुला दो सबसे नफरत.
यू बड़ा आसान सी ज़िदगी होगी गुजर जाये हसने हसाने पर
p@W@n

Monday, June 13, 2016

सफर तो यहा सबका मूशिक्ल हे,

सफर तो यहा सबका मूशिक्ल हे,
अब तक हमने सिर्फ़ नादानी मे काट दिया,
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किस्मत के हवाले तुम हो हम नही,
चलो वक्त को वक्त रहते बदला जाये,


एक हार ने ज़िदगी की हार ना हो
दोर ऐसा ना हो की खत्म हो होसला जाये ,

मुस्कूराहट बने हम सब चेहरो की,
नफरत के ईस दोर से अब निकला जाये,

चलेगे ओर अब मजिल पर रुकेगे,
गिरे हे तो क्या, अब खुद से ही सभला जाये,

हम सिर्फ़ हमसे हे ,हमसे थे ,
जो हे साथ उसके साथ ,फरक नही जो भला जाये,

हम वक्त को अपनी अहमियत बताये,
रुके कही पर ना,अब सिर्फ़ चला ओर चला जाये
p@W@n

Thursday, June 9, 2016

इश्क की वफ़ा इतनी सी मेरे शहर मे !

इश्क की वफ़ा इतनी सी मेरे शहर मे,
आज ये खाक हे ,,कल वो खाक हे

उल्झन उलफन हे इस जीस्त मे,
तुझे मुझे हराने की कोशीश बड़ी नापाक हे,

ये तेरी केसी नफरत ले रहा हू ना जाने,
शायद तुझे भी मेरी मोहब्बत की फिराक हे,

चेहरो की कारिस्तानी इतनी हे
बात दबी कुछ हे ओर दिल मे एक सुराक हे

मै लिखूगा हर सच हर कदम,
कल भी वही थी आज भी वही बात बेबाक हे

Monday, June 6, 2016

मुझे शोक हे आज भी सिर्फ़ खुद मे जीने का,

इस जमाने मे यू भी खुद को किस कदर सभाल रहा हू,
सच कहता हू उतनी ही जमाने की नफरत पाल रहा हू.
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मेरे जुनून मेरा शोक देख तू मे बदला नही,
मे वो नही जो आज भी सिक्को पे किस्मत उछाल रहा हू,


मुझे मालूम हे मै क्या था, ओर आज क्या हू,
तेरी ये महफ़िले तुझे मुबारक ,मालूम कर मै कल कीतना कमाल रहा हू

मुझे शोक हे आज भी सिर्फ़ खुद मे जीने का,
पर आज अफसोस बेवजह क्यू ये वक्त मे तुझमे निकाल रहा हू.

जनता हू ये राहे मूशिक्ल हे ,,जमीन बजर हे ,
पर हर उम्मीद के दरमियान बीज आज भी मे वही डाल रहा हू,

आज भले ये रग जमाने मे ढल जाएगा,
क्ल की वो सादगी, सच्चाई , अच्छई मे एक मिसाल रहा हू
p@w@n

Tuesday, May 24, 2016

एक उम्मीद हर नयी उम्मीद मे आस थी !

एक उम्मीद हर नयी उम्मीद मे आस थी,
मै हर दफ़ा हारा पर टूटी कभी ना सास थी,
हा मै एक शायर था कवि का कल,
मुझमे जो भी बात थी वो बडी खास थी !!!!!!
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इतना भी सरल ना रहा जिदगी को यहा तक लाना,
हर मोके पर यहा इस दिल की आजमाइश् थी

चन्द उम्मीदो मे हम जीये के केसे,
हजार खावाहिशे छूटी , फिर भी खवाहिश थी,

जो लोग यहा मेरा पता पूछने आये थे ,
उन्हे खुद की मालूम ना हुई पेदाइश् थी,

क्या बदला अगर देखु जमाने मे आज,
कल भी वही आज भी वही नुमाईश थी

यहा दिल किन पर सभाले गये हे,
बस वो आखे ,जुलफे ओर कुछ ल्फ़सो की फरमाइश् थी

Friday, March 18, 2016

ये शहर मुझसे मेरी ओकात पूछता हे,

ये शहर मुझसे मेरी ओकात पूछता हे,
मुझे छोटा समझ बखान अपने कद का

बहुत आसान हुआ आज मुझे खुद को समझना,
यू केसे नादान समझ छीन लिया हिस्सा मेरी जद का

मे खुद मे रहा जब तक महफूज था,
बड़ा बेदर्द था वो नजारा उस पार सरहद का

वो भी चला सब बड़ा सरल समझ कर,
आसान तुझे भी नही चेहरा पहचानना अपने हमदर्द का

यहा सब कसूर जानाब अपना रहा खुद का,
ये किस्सा रहा हे हद से वफादारी की ज़िद का

p@W@n