Monday, October 16, 2017

सुकून मिले जहा पा ले कुछ

सुकून मिले जहा पा ले कुछ ,
बचपन समझकर ही चुरा ले कुछ ,

दुनिया से दूर रहने की तलब हे ,
खेल समझकर खुद को छुपा ले कुछ

जिंदगी से अब वाकिफ मैं हु ,
मिलेगा सब तलब से चाह ले कुछ

मिलती नहीं वजह तो दूढ़ आज तू ,
बहानो से ही सही पर खुद को हसा ले कुछ !!!

Pawan !!

Thursday, October 12, 2017

ये बंदिशों में जकड़ा केसा समाज बना दिया

सब ख्वाबो को दौलत का मोहताज बना दिया ,
जो चल रहा था आज तक वही रिवाज़ बना दिया ,

मैं अभी तक एक ही जंग हरा हु मेरे दोस्त यहाँ ,
तूने तो मुझे हर महफ़िल में नजरअंदाज बना दिया

सच को छुपाने की हर तरफ नापाक कोशिशे रही हे ,
मैंने चाहा बोलना सबने मुझे खामोश आवाज बना दिया ,

कहते तो सब हे हमे बदलना हे अपने आज को ,
पर ये बेड़ियों ,ये बंदिशों में जकड़ा केसा समाज बना दिया ,

खुदकुशी की हे उसने न जाने क्या मजबूरी समझकर,
लड़ न पाया जिंदगी से मुशिकलों को हमने बेइलाज बना दिया ,

नफरतो में ढल गए ये मेरे सारे शहर वक़्त दर वक़्त ,
जी किसने जिदगी मुस्कुराकर सबने यहाँ दफन राज बना दिया !!!!!


पवन








Sunday, October 1, 2017

बड़ी मजिलो के यहाँ इंतकाम बड़े बड़े !

बड़ी मजिलो के यहाँ इंतकाम बड़े बड़े ,
हादसों के शहर ये मेरे ,पर नाम बड़े बड़े

मोहब्बत को जरा संभाल के ही चलना यहां,
मिले हे नफरत रखने वालो से अंजाम बड़े-२

मुझे मेरे माफिक मेरी मर्जी से जी लेने दे ,
फिर आज आये हे, देने वो मुझे पैगाम बड़े-२

थोड़े और सबर की मुझे आज जरूरत पडी हे ,
इम्तिहान ज्यादा हे मेरे हे क्योकि काम बड़े-२

Pawan .......!!

Tuesday, September 26, 2017

सफ़र

मेरे सफ़र के अंदाज़ बड़े बेहतरीन हे
आज फिर से कश्तियां डगमगाई हे !!!
Pawan .........….........!!!!

Monday, September 25, 2017

खटकता हे मेरा हुनर जमाने को

क़ीमत उसे मालूम नही मेरी अभी ,
वास्ता वो मुझसे इश्क का मागता हे !!

खटकता हे मेरा हुनर जमाने को ,
कुछ ऐसा दे जिससे जमाना मुझसे मोहब्बत करे !!


Pawan
.

मैं हजार ख्वाहिशें लेकर बैठा हूं

मैं हजार ख्वाहिशें लेकर बैठा हूं
वो कहता हे अभी और सबर रख,

मुझे अपने घर के हलात मालूम नही,
वो कहता है मेरे शहर की खबर रख

में भूल गया हूं अपने गाव जाना
वो कहता है मुझे हर शहर में घर रख,

निकलने की बात कहता गुजरे कल से
वो कहता है पर शायरी में तो असर रख

उसने देखे कहा है मेरे चोटों के निशान
वो कहता है आज भी ख्वाइशों में शिखर रख

Pawan

Tuesday, September 5, 2017

हो जायेगे बहुत इल्जाम हासिल

हो जायेगे बहुत इल्जाम हासिल
हो जायेगा जब एक मुकाम हासिल

जरूरत आज कल जीने की हे बस
कोशिश कर जो हो जाए जाम हासिल

मुझे दे दो मेरी इज्जत मुझे बस ,
कर लो सब मिलकर अपने इनाम हासिल

केसे होगा गुजारा यू यहा हमारा बोलो
सल्तनत तुम्हारी ओर करना है मुझे नाम हासिल !!!


पवन