Wednesday, February 22, 2017

मिजाज ये समझा वो आज ज़िदगी का

मुसाफिर ने शहर बदला था एक उम्मीद मे,
पर देखो ये शहर ओर भी तन्हा निकला !!!!!!!!!!!!
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उम्मीद थी आसमा पाने की हरदम,
देखो ये करवा कहा से कहा निकला,


मुशिक्ल यहा होना लाजमी था,
जिसके दरमियना खवहिश का दोर बेपनहा निकला,

सोचा था उसने आज वक्त मेरे साथ हे ,
पर यहा उस मुजरिम का बदला हुआ गवाह निकला

मिजाज ये समझा वो आज ज़िदगी का,
ज्यादा ही समझना ज़िदगी को यहा अब गुनाह निकला

Monday, February 20, 2017

ज़िदगी जी गयी पुरी होगी हर हसरत समझ कर !!

ज़िदगी जी गयी पुरी होगी हर हसरत समझ कर,
जो मिला यहा सब सही जो नही जाने दिया किस्मत समझ कर ,

आज भी जिसके नसीब हे हवाले रोटी नही ,
फिर मागा उसने कुछ तूझसे ही ,तुझे कूदरत समझ कर ,


ये यहा ऐसी ही ज़िदगी हे जनाब ,
जो मिल रहा हे उसे रख लो दिन की बरकत समझ कर ,

ज़िदजी एक नशा हे हो गया हो तो हो गया,
कुछ नही होगा फिर, जाम पी गया अगर तू शरबत समझ कर,

शोक जुनून अपने दरमियान हमेशा ले के चल,
यू ही जी हरदम ज़िदगी ,खुद को ज़िदगी की कूरबत समझ कर !!

Sunday, October 23, 2016

आखो को दिखने लगा अब हर सच

अब ये सूरत बदलनी चाहिए,
आग तेरे दिल मे लगे या मेरे दिल मे अब आग लगनी चाहिए,
(दूषयत कुमार)

आखो को दिखने लगा अब हर सच,
ये झूठ ओर सच की परत अब उतरनी चाहिए,

वो क्या ओकात रखते बुजदिल,
मेरे मुल्क मेरे जमीर की तस्वीर निखरनी चाहीये

रास्ता भी मिला मकसद भी,
अब इन काफिलो की मजिल हर कदम चढ़नी चाहिए

बेवजह हो गये फिदा मुल्क पर वीर,
तुझे सच सुनने समझने की हिम्मत तो करनी चाहिए

नफरत देखी हे मेने ये केसी मुल्क से,
समझा हू उतनी तेरे सीने मे मोहब्बत बढनी चाहीये

अब ये सूरत बदलनी चाहिए,
आग तेरे दिल मे लगे या मेरे दिल मे अब आग लगनी चाहिए,
p@W@n

Wednesday, September 7, 2016

कुछ अधूरा नही होता अब यहा !!!

कुछ अधूरा नही होता अब यहा,
मुकम्मल होता हे दोस्ती,नफरत हो या प्यार !!!
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यू भी खुद को मत गवा यहा,
खुदारी मे जीने का हर इत्जाम रख,

जीना हे खुद से हर दोर मे यहा,
फरक कुछ नही चाहे हाथो मे जाम रख,
ये भी एक दोर हे वो भी एक था,
उधार ना एक पल या एक को शाम रख,
नफरत तो मिलना लाज़मी ही हे यहा,
रख सके फिर भी मोहब्बत के पेगाम रख,
बाजार हे वाज़िद लगता हे ये समझ,
लूटा ना यू खुद को कुछ तो अपने भी नाम रख !
p@W@n

Tuesday, August 30, 2016

कोई शायर होगा फ़िर शायरी कही खवाब होगा !!!!!

कोई शायर होगा फ़िर शायरी कही खवाब होगा,
किसी की सासो मे दफन होने को कही दिल बेताब होगा

कोई सभाल के रख पायेगा यहा खुद को,
अगर इन महफिलो मे वही गुलाब वही शबाब होगा

वो भी चलते हे ,हम चलते हे एक उम्मीद पर,
कभी कही हमारी हर कोशीशो का हिसाब होगा,

सोचता हू यू उल्झे रहेगे हम हर दफा क्या,
ये ज़िदगी के सवालो का कभी कही जवाब होगा

मुमकिन कर सब बदलना होगा,
वक्त तेरा हे जो सब बेमीसाल ओर लाजवाब होगा

p@W@n

Thursday, July 28, 2016

यहा जमाने को मुझे यू हराने का इरादा नापाक बन गया,

यहा जमाने को मुझे यू हराने का इरादा नापाक बन गया,
एक हसीना सा दिल मे खवाब था बेवजह खाक बन गया,

जब भी मेने झूठ देखा समझा जाना यहा,
मेरे सच कहने का असूल ओर भी बेबाक बन गया ,

गिरना सभलना चलता रहा ज़िदगी हे हर दोर मे,
जब भी सभला गिराना सबकी नजरो मे फिराक बन गया,

ज़िदगी को सिर्फ़ इतना सा ही समझा हे मेने,
बेईमानी फरेब जहा भी साथ मिले तब हर झूठ भी पाक बन गया
p@W@n

Friday, June 24, 2016

ये समझदारी भी किस काम की हे यहा !

ये समझदारी भी किस काम की हे यहा,
बडा ही अज़ान ओर असमझ सा रास्ता हे मेरा !!!
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चलने का जून्ँन हे अभी भी मुझमे रास्तो की खबर कहा,
अब तो सिर्फ़ चाह रुककर थमकर बेठने की किसी ठिकाने पर,


अजीब सी कशमकश हे ज़िदगी के इस दोर मे यहा,
वही निगाहे वही अपनापन ओर ज़िदगी फिर मुकम्मएल निशाने पर,

हमसे क्या पूछते हे हम क्या हे हम क्या थे,
सिर्फ़ मकसद ओर बचा यही सवाल हे यहा क्या जमाने पर,

जानता हू खवाब ओर हकी कत के हर एक वक्त को,
ये जवानी हे ,,वो बचपना था जो निकल गया यू बहलाने पर,

जाना हे अगर भूला सको तो भुला दो सबसे नफरत.
यू बड़ा आसान सी ज़िदगी होगी गुजर जाये हसने हसाने पर
p@W@n